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title: 'मैहर घराना'
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  name: Anonymous
updated: '2026-10-17T11:36:49+00:00'
type: website
summary: 'मैहर घराना हिंदुस्तानी वाद्य संगीत का 20वीं सदी का घराना है, जो ब्रिटिश भारत की छोटी रियासत मैहर में अलाउद्दीन खान के इर्द-गिर्द बना। मैहर आज मध्य प्रदेश में है। सितार पर इसकी परंपरा रवि शंकर और निखिल बनर्जी से होकर चलती है, और अलाउद्दीन खान की बेटी अन्नपूर्णा देवी ने इसे सुरबहार पर आगे बढ़ाया। मैहर की इसी तालीम से सरोद वादक और बांसुरी वादक भी निकले।सरोद वादक अलाउद्दीन खान कई वाद्य सिखाते थे, और उन्होंने मैहर में इस घराने की नींव रखी। अधिकतर विवरणों के अनुसार वे 1918 में वहाँ दरबारी संगीतकार बने, हालाँकि दरबार (संस्था) की कलाकार प्रोफ़ाइल 1907 बताती है। दरबार के लिए लिखा जमीला सिद्दीकी का लेख मैहर की एक परंपरा को 19वीं सदी में रखता है, पर किसी पुराने संगीतकार का नाम नहीं लेता। तानसेन की परंपरा के वीणा वादक, रामपुर के वजीर खान से उनकी तालीम और उनके बेटे अली अकबर खान की सरोद परंपरा सेनिया-मैहर घराने की कहानी का हिस्सा हैं।निखिल बनर्जी ने 1986 में आइरा लैंडगार्टेन को बताया कि उनके गुरु ने सुरसिंगार, सुरबहार और वीणा की शैली सितार और सरोद में उतारी। बांग्लापीडिया सितार वादन में बदलाव का श्रेय अलाउद्दीन खान को देता है, जिन्होंने उस पर सरोद की तकनीक लागू की। उसी बातचीत में बनर्जी ने कहा कि अलाउद्दीन खान ने खरज का तार जोड़ा, यानी मंद्र सप्तक के सा के लिए एक अतिरिक्त मोटा तार। सा ही आधार स्वर है। गेल का Encyclopedia of India इस मोटे तार के चलन को बढ़ावा देने का श्रेय रवि शंकर को देता है।रवि शंकर ने 1938 में मैहर में सीखना शुरू किया, लगभग सात साल वहाँ रहे और 1941 में अन्नपूर्णा देवी से विवाह किया। गेल का Encyclopedia of World Biography पश्चिम को भारतीय संगीत परंपराओं से परिचित कराने का श्रेय किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज़्यादा उन्हें देता है। निखिल बनर्जी (1931 से 1986) 1947 में लगभग 14 या 15 साल की उम्र में मैहर पहुँचे और क़रीब पाँच साल वहाँ तालीम ली। फिर उन्होंने बंबई में अली अकबर खान से चार या पाँच साल सीखा और अन्नपूर्णा देवी से भी सीखते रहे, जो अपने भाई के पाठों में शामिल हुई थीं और जिन्होंने सुरबहार अपनाया था। बांग्लापीडिया अलाउद्दीन खान के शिष्यों में सितार वादक इंद्रनील भट्टाचार्य का नाम लेता है।प्रमुख कलाकारअलाउद्दीन खान, संस्थापक, सरोद वादक और मैहर के दरबारी संगीतकाररवि शंकर, सितार, 1938 से मैहर मेंनिखिल बनर्जी (1931 से 1986), सितार, 1947 से मैहर मेंअन्नपूर्णा देवी, सुरबहार, अलाउद्दीन खान की बेटी और निखिल बनर्जी की गुरुअली अकबर खान, सरोद, अलाउद्दीन खान के बेटे, जिन्होंने बंबई में निखिल बनर्जी को सिखायाइंद्रनील भट्टाचार्य, सितार, अलाउद्दीन खान के शिष्यस्रोतIra Landgarten, निखिल बनर्जी से बातचीत (1986), Raga Records की पुस्तिका (1991)Mobarak Hossain Khan और Reenat Fauzia, Alauddin Khan और Ali Akbar Khan पर प्रविष्टियाँ, Banglapedia (Asiatic Society of Bangladesh)Encyclopedia of India और Encyclopedia of World Biography (Gale), Ravi Shankar और Ali Akbar Khan पर प्रविष्टियाँDarbar, अलाउद्दीन खान पर Jameela Siddiqi का फ़ीचर और उन पर Darbar की कलाकार प्रोफ़ाइलTanvir A. Khan, अलाउद्दीन खान पर फ़ीचर, The Daily Star, Dhaka (2012)'
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## [मैहर घराना

 ](/hi-in/gharana/maihar-gharana)

**मैहर घराना** हिंदुस्तानी वाद्य संगीत का 20वीं सदी का घराना है, जो ब्रिटिश भारत की छोटी रियासत मैहर में **अलाउद्दीन खान** के इर्द-गिर्द बना। मैहर आज मध्य प्रदेश में है। [सितार](/hi-in/instrumental/hindustani-classical/sitar) पर इसकी परंपरा रवि शंकर और निखिल बनर्जी से होकर चलती है, और अलाउद्दीन खान की बेटी अन्नपूर्णा देवी ने इसे **सुरबहार** पर आगे बढ़ाया। मैहर की इसी तालीम से [सरोद](/hi-in/instrumental/hindustani-classical/sarod) वादक और बांसुरी वादक भी निकले।

सरोद वादक अलाउद्दीन खान कई वाद्य सिखाते थे, और उन्होंने मैहर में इस घराने की नींव रखी। अधिकतर विवरणों के अनुसार वे 1918 में वहाँ दरबारी संगीतकार बने, हालाँकि दरबार (संस्था) की कलाकार प्रोफ़ाइल 1907 बताती है। दरबार के लिए लिखा जमीला सिद्दीकी का लेख मैहर की एक परंपरा को 19वीं सदी में रखता है, पर किसी पुराने संगीतकार का नाम नहीं लेता। तानसेन की परंपरा के वीणा वादक, रामपुर के वजीर खान से उनकी तालीम और उनके बेटे अली अकबर खान की सरोद परंपरा [सेनिया-मैहर घराने](/hi-in/gharana/senia-maihar-gharana) की कहानी का हिस्सा हैं।

निखिल बनर्जी ने 1986 में आइरा लैंडगार्टेन को बताया कि उनके गुरु ने सुरसिंगार, सुरबहार और वीणा की शैली सितार और सरोद में उतारी। बांग्लापीडिया सितार वादन में बदलाव का श्रेय अलाउद्दीन खान को देता है, जिन्होंने उस पर **सरोद की तकनीक** लागू की। उसी बातचीत में बनर्जी ने कहा कि अलाउद्दीन खान ने **खरज** का तार जोड़ा, यानी मंद्र सप्तक के सा के लिए एक अतिरिक्त मोटा तार। सा ही आधार स्वर है। गेल का Encyclopedia of India इस मोटे तार के चलन को बढ़ावा देने का श्रेय रवि शंकर को देता है।

रवि शंकर ने 1938 में मैहर में सीखना शुरू किया, लगभग सात साल वहाँ रहे और 1941 में अन्नपूर्णा देवी से विवाह किया। गेल का Encyclopedia of World Biography पश्चिम को भारतीय संगीत परंपराओं से परिचित कराने का श्रेय किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज़्यादा उन्हें देता है। निखिल बनर्जी (1931 से 1986) 1947 में लगभग 14 या 15 साल की उम्र में मैहर पहुँचे और क़रीब पाँच साल वहाँ तालीम ली। फिर उन्होंने बंबई में अली अकबर खान से चार या पाँच साल सीखा और अन्नपूर्णा देवी से भी सीखते रहे, जो अपने भाई के पाठों में शामिल हुई थीं और जिन्होंने सुरबहार अपनाया था। बांग्लापीडिया अलाउद्दीन खान के शिष्यों में सितार वादक इंद्रनील भट्टाचार्य का नाम लेता है।

### प्रमुख कलाकार

- अलाउद्दीन खान, संस्थापक, सरोद वादक और मैहर के दरबारी संगीतकार
- रवि शंकर, सितार, 1938 से मैहर में
- निखिल बनर्जी (1931 से 1986), सितार, 1947 से मैहर में
- अन्नपूर्णा देवी, सुरबहार, अलाउद्दीन खान की बेटी और निखिल बनर्जी की गुरु
- अली अकबर खान, सरोद, अलाउद्दीन खान के बेटे, जिन्होंने बंबई में निखिल बनर्जी को सिखाया
- इंद्रनील भट्टाचार्य, सितार, अलाउद्दीन खान के शिष्य

### स्रोत

- Ira Landgarten, निखिल बनर्जी से बातचीत (1986), Raga Records की पुस्तिका (1991)
- Mobarak Hossain Khan और Reenat Fauzia, Alauddin Khan और Ali Akbar Khan पर प्रविष्टियाँ, Banglapedia (Asiatic Society of Bangladesh)
- Encyclopedia of India और Encyclopedia of World Biography (Gale), Ravi Shankar और Ali Akbar Khan पर प्रविष्टियाँ
- Darbar, अलाउद्दीन खान पर Jameela Siddiqi का फ़ीचर और उन पर Darbar की कलाकार प्रोफ़ाइल
- Tanvir A. Khan, अलाउद्दीन खान पर फ़ीचर, The Daily Star, Dhaka (2012)



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