शाहबाज हुसैन
स्थान
मैनचेस्टर, यूनाइटेड किंगडमविशेषज्ञता
Tablaआगामी कार्यक्रम
मैनचेस्टर में अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स: कश्मीर और दिल्ली के तार
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक अदनान खान, संतूर पर विनय देसाई, और तबले पर उस्ताद अकरम खान तथा मैनचेस्टर के अपने उस्ताद शाहबाज हुसैन। शुक्रवार, 20 नवंबर, शाम 7 बजे, द स्टोलर हॉल, मैनचेस्टर।
शाहबाज हुसैन के बारे में
शाहबाज हुसैन जाने-माने और मँजे हुए तबला वादक हैं। वे यूरोप के बेहतरीन तबला वादकों में गिने जाते हैं और भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा फ़्यूज़न, दोनों में अपने ऊर्जा भरे और बारीक वादन के लिए पहचाने जाते हैं।
पहले उन्होंने अपने पिता, गायक उस्ताद मुमताज़ हुसैन से सीखा। फिर कई गुरुओं से तालीम ली: दिल्ली घराने के उस्ताद फ़ैयाज़ खान से, और पंजाब घराने के उस्ताद शौकत हुसैन खान तथा उस्ताद अल्ला रक्खा से। इससे उनकी शैली में कई रंग आए और वह हर तरह के संगीत में ढल जाती है। वे फ़्यूज़न समूह इंडस की अगुवाई करते हैं और दौरे पर आए शास्त्रीय कलाकारों की संगत करते हैं। उत्तरी इंग्लैंड में वे तबला शिक्षक के रूप में सक्रिय हैं।
बीते वर्षों में उन्होंने उस्ताद इरशाद खान, उस्ताद निशात खान, शाश्वती मंडल पॉल और देबस्मिता भट्टाचार्य जैसे कई नामी कलाकारों के साथ काम किया है। लय की बारीकियों पर पकड़ और संगीत की गहरी समझ उनके वादन की पहचान है। इसी से वे संगतकार और एकल वादक, दोनों रूपों में अलग दिखते हैं, और उनका जीवंत, भावपूर्ण वादन श्रोताओं को बाँधे रखता है।
भारत और पाकिस्तान के कई बड़े उस्तादों के बीच संगतकार के रूप में उनकी बड़ी माँग है, जिनमें उस्ताद सलामत अली खान, उस्ताद शाहिद परवेज़, उस्ताद रईस खान, उस्ताद फ़तेह अली खान, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और ग़ज़ल के दिग्गज ग़ुलाम अली शामिल हैं। शाहबाज प्रस्तुतियों के लिए नियमित रूप से दुनिया भर में जाते हैं: पूरे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और भारतीय उपमहाद्वीप में।
उन्होंने वॉशिंगटन डी.सी. के स्मिथसोनियन इंस्टिट्यूशन, न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर और लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल तथा क्वीन एलिज़ाबेथ हॉल जैसे कई प्रतिष्ठित मंचों पर बजाया है। कलासुधा की कई कॉन्सर्ट शृंखलाओं और परियोजनाओं से वे जुड़े रहे हैं। उनके बैंड इंडस के पहले एल्बम Firefly को समीक्षकों ने सराहा, और बैंड ब्रिटेन तथा दूसरे देशों में दौरे करता रहता है। शाहबाज हुसैन अपनी पीढ़ी के अग्रणी तबला वादकों में माने जाते हैं। अपने मन मोह लेने वाले वादन के लिए उन्हें कई सम्मान मिले हैं, जिनमें 2008 में पाकिस्तान सरकार का प्रतिष्ठित “सन ऑफ़ लाहौर” पुरस्कार शामिल है। तबले का ज्ञान दूसरों तक पहुँचाने की भी उन्हें उतनी ही लगन है। वे समर्पित शिक्षक हैं और ब्रिटेन भर में नियमित रूप से सिखाते हैं, न्यूकैसल और हडर्सफ़ील्ड विश्वविद्यालयों में भी।