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इकोज़ ऑफ़ काशी

सितम्बर 28, 2026 3 ट्रैक • 56 min
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वाराणसी के आदित्य दीप का पखावज एकल ईपी: दो ट्रैक चौताल में और एक सादरा में, हारमोनियम पर डॉ इंद्रदेव चौधरी का लहरा। तीन ट्रैक, 57 मिनट। रिलीज़ 15 अगस्त 2026।

ट्रैक सूची

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एल्बम के बारे में

आदित्य दीप ध्रुपद का प्रमुख ताल-वाद्य पखावज बजाते हैं, और इकोज़ ऑफ़ काशी उनका एकल ईपी है। यह 15 अगस्त 2026 को रिलीज़ हुआ: तीन ट्रैक, कुल सत्तावन मिनट, और हर ट्रैक का नाम उसकी ताल पर। डॉ इंद्रदेव चौधरी हारमोनियम पर लहरा बजाते हैं, यानी वह दोहराई जाने वाली धुन जो पखावज के साथ ताल का चक्र बनाए रखती है। काशी वाराणसी का पुराना नाम है, और आदित्य दीप का जन्म 1992 में वहीं हुआ। उन्होंने बनारस के पखावजी पंडित श्रीकांत मिश्र (1952 से 2012) से सीखा, जिन्होंने उस्ताद ज़िया मोहिउद्दीन डागर और पंडित रामचतुर मल्लिक की संगत की थी।

तीन में से दो ट्रैक ध्रुपद की बारह मात्रा की ताल चौताल में हैं: दो-दो मात्राओं के छह विभाग, पहली मात्रा पर सम और तीसरी व सातवीं पर खाली। श्रीकांत मिश्र यही ताल डागर और दरभंगा घरानों के गायकों के साथ बजाते रहे। आदित्य दीप यहाँ इसे बिना किसी गायक के बजाते हैं। पहला ट्रैक उनतीस मिनट का है। जलद चौताल साढ़े तेरह मिनट का है, और जलद का मतलब है तेज़।

अंतिम ट्रैक सादरा है, दस मात्रा की ताल में चौदह मिनट। इसकी मात्राएँ झपताल जितनी हैं, और यह नाम सादरा गायकी से आया है, जो ध्रुपद और ख़याल के बीच की शैली है। आदित्य दीप संगतकार भी हैं और एकल वादक भी। मंच पर वे पंडित ऋत्विक सान्याल और गुंदेचा बंधुओं के साथ बजाते हैं, और यह ईपी उनके एकल वादन का दस्तावेज़ है।

कलाकार

एल्बम जानकारी

रिलीज़ तारीख सितम्बर 28, 2026
कुल ट्रैक 3
अवधि 56 min
शैली Echoes of Kashi
Echoes of Kashi