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आर. एन. प्रकाश
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फ़िल्टर
फ़िल्टर
आदित्य दीप वाराणसी के पखावज वादक और पंडित श्रीकांत मिश्र के शिष्य हैं। वे अग्रणी ध्रुपद कलाकारों की संगत करते हैं और एकल वादन भी करते हैं। वे कलासुधा अकादमी में सिखाते हैं।
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक अदनान खान गायकी अंग में बजाते हैं। उन्होंने दिल्ली में अपने नाना उस्ताद ज़फ़र अहमद खान, पिता उस्ताद सईद खान और गायक उस्ताद मशकूर अली खान से तालीम ली है।
पंडित अजय प्रसन्ना अंतरराष्ट्रीय ख्याति के बांसुरी वादक हैं और एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार से आते हैं। वे अपने पिता पंडित भोलानाथ प्रसन्ना की विरासत सँभाले हुए हैं, जो भारत के अब तक के सर्वश्रेष्ठ बांसुरी वादकों में से एक थे। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया भोलानाथ प्रसन्ना के शिष्यों में हैं।
उस्ताद मोहम्मद अकरम खान अजराड़ा घराने के सम्मानित भारतीय शास्त्रीय तबला वादक हैं। घराने की सातवीं पीढ़ी के ये कलाकार चालीस साल से ज़्यादा समय से दुनिया भर में बजाते आए हैं। वे अपने असाधारण हुनर, परंपरा की समझ और तबले की अजराड़ा शैली को बचाए रखने की लगन के लिए जाने जाते हैं।
कोलकाता की कथक नृत्यांगना और गुरु, जिन्होंने डॉ मालबिका मित्र से जयपुर और लखनऊ दोनों शैलियों की तालीम पाई। पुष्पक एकेडमी ऑफ़ डांस की संस्थापक, जो कोलकाता और टोरंटो में सिखाती है।
सितार
सेनिया-मैहर परंपरा के सितार वादक देबादित्य चक्रवर्ती गायकी और तंत्रकारी को गहराई और स्पष्टता के साथ मिलाते हैं। उन्होंने 2023 में कलासुधा के पूर्वी फ़ेस्टिवल में बजाया।
देबाशीष चक्रवर्ती भारतीय शास्त्रीय स्लाइड गिटार के जाने-माने और सिद्धहस्त वादक हैं। वे दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोप के बड़े अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोहों में खूब बजा चुके हैं।
दीपक शाह भारतीय पियानो वादक और संगीतकार हैं, जो ग्रैंड पियानो पर भारतीय शास्त्रीय राग बजाते हैं। उनके संगीत में भारतीय और पश्चिमी शैलियाँ सहज रूप से घुल-मिल जाती हैं। पच्चीस साल से ज़्यादा समय से वे भारत और विदेश में बजा रहे हैं। उनका संगीत आत्मीय और निर्मल लगता है, और दोनों संस्कृतियों से गहरे जुड़ा है।
डॉ. लवली शर्मा सितार वादक हैं और उत्तर प्रदेश के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से जुड़ी हैं। वे डी.लिट्. पाने वाली पहली महिला सितार वादक हैं, कला भूषण से सम्मानित हैं और राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलपति रह चुकी हैं।
कोलकाता के दुर्जय भौमिक संगतकार और एकल वादक, दोनों रूपों में सराहे जाते हैं। वे संगीत के माहौल में जन्मे और पले-बढ़े। बनारस घराने के पंडित दुलाल नट्ट ने उन्हें संगीत की शुरुआती तालीम दी और उनकी प्रतिभा को निखारा।2001 से वे तालयोगी पंडित सुरेश तलवलकर से संगीत और लय की बारीकियाँ सीख रहे हैं और उन्हीं के पास उच्च अध्ययन कर रहे हैं। उनके तबले की मीठी आवाज़, तकनीक पर पकड़ और संगीत की बारीकियों की समझ उन्हें भारत और विदेश के प्रमुख शास्त्रीय संगीत समारोहों तक ले गई है, जहाँ उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज कलाकारों की संगत की है।ढाई दशक से लंबे करियर में वे अपनी पीढ़ी के उन तबला वादकों में हैं जिनकी सबसे ज़्यादा माँग रहती है। विश्व संगीत के साझा कार्यक्रमों में उन्होंने कई देशों के जाने-माने संगीतकारों के साथ बजाया है, जैसे जापान के आर्ट ली, एस्टोनिया के राहो लांगसेप और वियना यूथ क्वायर। हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के कलाकारों के साथ उन्होंने ताल-समूह "नाद कॉन्फ्लुएंस" में बजाया है और उसका निर्देशन किया है। देश के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में संगीत-रसिकों और समीक्षकों ने उनके वादन पर ध्यान दिया है।दुर्जय आकाशवाणी, दूरदर्शन और आईसीसीआर के "ए" ग्रेड कलाकार हैं। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय (खैरागढ़ विश्वविद्यालय) से संगीत में स्नातकोत्तर किया। एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व, अमेरिका और कनाडा के कई संगीत समारोहों और मंचों पर श्रोताओं ने उनके वादन को खूब सराहा है।पुरस्कार:‘न्यू एज तबला माएस्ट्रो’, एशियन अफ्रीकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, 2022‘पंडित रामजी उपाध्याय सम्मान’, मंगलध्वनि फाउंडेशन, 2018‘कलाश्री सम्मान’, स्वरांजलि ट्रस्ट, नई दिल्ली, 2021‘संगीत सहोदर’, संगीत कला केंद्र, आगरा, 2013उन्होंने इन दिग्गज कलाकारों की संगत की है: पंडित राजन और साजन मिश्र, विदुषी गिरिजा देवी, उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र खान, उस्ताद इमरत खान, उस्ताद शुजात खान, पंडित विश्वजीत रॉय चौधरी, पंडित भजन सोपोरी, पंडित विश्व मोहन भट्ट, पंडित रोनू मजुमदार, पंडित राकेश चौरसिया, पंडित अजय चक्रवर्ती, पंडित राम नारायण, पंडित उल्हास कशालकर, पंडित विनायक तोरवी, पंडित बुधादित्य मुखर्जी, विदुषी पद्मा तलवलकर और कई अन्य नामी कलाकार। वे नई दिल्ली में रहते हैं और दुनिया भर के विद्यार्थियों को पूरी लगन से सिखाते हैं।डिस्कोग्राफ़ी:Rhythmic Colours, Questz World (एकल)Safar - A Voyage through Ragas, Questz World (एकल)The Indian Cello, DDD (चेलो के साथ संगत)Scintillating Sarangi, Times Music (सारंगी के साथ संगत)
गिटार
जूलियानो मोडारेली अंतरराष्ट्रीय ख्याति के इतालवी गिटार वादक और संगीतकार हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, जैज़ और समकालीन विश्व संगीत का उनका अपना मेल ही उनकी पहचान है। लंदन में रहते हुए उन्होंने गिटार पर अपनी अलग आवाज़ बनाई है, जिसमें भारतीय ताल और राग की परंपराओं की गहरी छाप है और जैज़ की आज़ादी तथा मौके पर रचने की रवानी भी। वे लंबे समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत के कुछ बेहतरीन कलाकारों के साथ बजाते रहे हैं, जिनमें पंडित देबाशीष चक्रवर्ती, शाहबाज हुसैन, आर. एन. प्रकाश और पंडित अजय प्रसन्ना शामिल हैं। सहज महारत और गहरे भाव वाला उनका संगीत संस्कृतियों को जोड़ता है। वे पुरस्कार विजेता फ़्यूज़न समूह केफ़ाया और क्वेस्ट एनसेंबल के संस्थापक सदस्य भी हैं। वे दुनिया भर में बजाते और सिखाते हैं, और संस्कृतियों को जोड़ने वाली उनकी कला श्रोताओं को प्रेरित करती है।
तबला
हनीफ खान की संगीत यात्रा पिता उस्ताद हिदायत खान के मार्गदर्शन में शुरू हुई, जो भारत के सम्मानित तबला वादक थे। वे दिल्ली घराने के कायदा वादन में माहिर हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत के रूपों को श्रोताओं तक पहुँचाने और 'फ़्यूज़न' में अपने हुनर से नए रूप गढ़ने के लिए वे जाने जाते हैं। उनका संगीत करियर उन्हें कई देशों तक ले गया है। वे शास्त्रीय तालीम पाए हुए, मँजे हुए भारतीय तालवादक हैं और कई शैलियों में सहज हैं। उन्होंने हरि प्रसाद चौरसिया, उस्ताद फ़तेह अली खान, ग़ुलाम अली, ग़ुलाम मुस्तफ़ा, पंडित देबाशीष चक्रवर्ती, पंडित अजय प्रसन्ना, अल-मसरी हुसैन और राजन-साजन जैसे नामी कलाकारों की संगत की है।
सितार
जोनाथन मेयर ने पाँच साल की उम्र में संगीत शुरू किया। नाना अल्बर्ट हेप्टन से वायलिन, जेम्स मेथुएन-कैंपबेल से पियानो और अपने पिता से रचना सीखी। सोलह साल की उम्र में उन्होंने सेनिया घराने के शिष्य, पश्चिमी सितार वादक क्लेम अल्फ़र्ड से सितार सीखना शुरू किया। 1993 में उन्होंने बर्मिंघम कंज़र्वेटॉयर से बी.म्यूज़. (ऑनर्स) किया, जहाँ उन्होंने एंड्रयू डाउन्स से रचना पढ़ी और साथ में सितार वादन भी। फिर उन्होंने उस्ताद वजाहत खान से इमदादख़ानी घराने की और पंडित सुब्रतो रॉय चौधरी से सेनिया बीनकार शैली की तालीम लेकर अपनी तकनीक माँजी। आज वे उस्ताद इरफ़ान मुहम्मद खान से लखनऊ-शाहजहाँपुर घराने की उच्च तालीम ले रहे हैं और उस्ताद यूसुफ़ अली खान से ताल की तालीम।
तबला
कयाम हुसैन उभरते हुए ब्रिटिश तबला वादक हैं और उस्ताद शाहबाज हुसैन के बेटे तथा शिष्य हैं। वे गोरिल्लाज़ के साथ तबला बजा चुके हैं और कलासुधा के कार्यक्रमों में आने वाले कलाकारों की संगत करते हैं।
कोलकाता के संगीत परिवार में जन्मे और बनारस घराने के बड़े उस्तादों से तालीम पाए कौसिक के तबले में ज़ोर भी है और कोमलता भी, और इसी के लिए दुनिया भर में उनकी सराहना होती है। शास्त्रीय कार्यक्रम हो, नृत्य की संगत हो या अलग-अलग संस्कृतियों के कलाकारों के साथ साझा प्रस्तुति, उनका जोशीला वादन मंच में नई जान डाल देता है। लिवरपूल के मिलापफ़ेस्ट में आर्टिस्ट-इन-रेज़िडेंस रहते हुए और अमेरिका, कनाडा, यूरोप तथा एशिया के दौरों में उन्होंने दुनिया के कई मशहूर मंचों पर श्रोताओं को लय पर अपनी महारत सुनाई है।
ध्रुपद
पंडित प्रेमकुमार मल्लिक दरभंगा घराने के अग्रणी ध्रुपद गायक हैं। वे अपने गहरे आलाप, दमदार आवाज़ और पुरानी वंश-परंपरा के लिए जाने जाते हैं और सदियों पुरानी शास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
आर. एन. प्रकाश बहुमुखी तालवादक हैं, जो घटम, खंजीरा और मृदंगम जैसे दक्षिण भारतीय ताल वाद्यों में माहिर हैं। उन्होंने 6 साल की उम्र से बेंगलुरु में के.एन. कृष्णमूर्ति से यह कला सीखी।
Raymond Wui Man Yiu is a classically trained pianist based in London. Born in Hong Kong, he moved to Aberdeen in 2008 to study at the Aberdeen City Music School under the tutelage of Peter Evans. There, he made his concerto debut in 2010 with Mozart’s Piano Concerto No. 20 and, after winning Aberdeen Young Musician of the Year, went on to perform works by Schumann, Prokofiev, Rachmaninoff and Grieg at festivals like the Aberdeen International Youth Festival and the Edinburgh Fringe.In 2012, Raymond won a scholarship to the Guildhall School of Music & Drama, where he earned both his bachelor’s and master’s degrees with Distinction studying with Joan Havill. He has since collected awards at the Springboard, Worthing, and Edinburgh festivals; placed at the Bromsgrove, Moray, and Windsor international competitions; and in 2019, took Third Prize at the Norah Sande Awards and the Christopher Duke International Piano Competition. He also joined the KNS Classical label.Most recently, he completed an Artist Diploma at Trinity Laban Conservatoire under the guidance of Gabriele Baldocci, winning the John Longmire and Alfred Kitchin Competitions for his performances of Beethoven and Schumann. As part of the Bolling Trio, he won the Carne Trust Chamber Music Competition, and he’s appeared as a soloist in Beethoven’s Emperor Concerto with the London Gay Symphony Orchestra. His studies have been supported by the Felix Marr Award, the Leathersellers’ Company, the Dewar Arts Awards, and others.Alongside performing, Raymond teaches piano at St Albans High School for Girls, Newton Prep and St Philomena’s. His students have won scholarships to Wells Cathedral Music School, Alleyn’s, St Dunstan’s College, Royal Grammar School (Dubai) and Kingsdale. He is also researching the teaching methods and music of Tobias Matthay, a pivotal English piano pedagogue of the 20th century.
पियानो
रेकेश चौहान कई पुरस्कार जीत चुके ब्रिटिश भारतीय पियानो वादक और संगीतकार हैं, जो पूर्वी और पश्चिमी शास्त्रीय परंपराओं के नए ढंग के मेल के लिए जाने जाते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की शुरुआती तालीम उन्हें अपने संगीतकार पिता से मिली और पश्चिमी रचना की औपचारिक शिक्षा विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान। इन दोनों को मिलाकर उन्होंने अपनी अलग, भावपूर्ण संगीत-भाषा बनाई है। उनके पास लेस्टर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में फ़र्स्ट क्लास ऑनर्स की डिग्री है। 2015 में आए पहले एल्बम Beyond Roots में तबला वादक कौसिक सेन जी थे और राष्ट्रीय रेडियो ने उस पर ध्यान दिया। तब से रेकेश गहराई और नएपन वाले संगीत रचनाकार के रूप में अपनी साख बनाते गए हैं।
सैम इवांस ऑस्ट्रेलिया के समकालीन तबला वादक हैं। वे मेलबर्न में कलाकार, संगीतकार और शिक्षक के रूप में काम करते हैं। भारत के कोलकाता में पंडित अनिंदो चटर्जी से और अमेरिका में उस्ताद ज़ाकिर हुसैन से दस साल सीखने के बाद अब वे पारंपरिक भारतीय संगीत और समकालीन विश्व संगीत, दोनों देश-विदेश में नियमित रूप से बजाते हैं।
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