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रीडिंग राग रेज़ोनेंस: बो, बीट, एंड ब्रेथ

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12 सितंबर 2026
शनिवार
12:00 अप – 2:30 अप
2 घंटे, 30 मिनट
The Great Hall, Reading
रेडिंग, GB

Get Your Tickets

Ticket Price

£15 £27

Event Tags

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12 सितंबर 2026
शनिवार
12:00 अप – 2:30 अप
2 घंटे, 30 मिनट
The Great Hall, Reading
रेडिंग, GB

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Event Summary

द ग्रेट हॉल, रीडिंग में सारंगी की गायकीय मधुरता और तबले की प्रचंड ऊर्जा को बारी-बारी एकल प्रस्तुतियों में निहारें — एक अद्भुत संगीत-संवाद का अनुभव करें।

Event Highlights

1

तीन पीढ़ियों की सारंगी विरासत

2

भारत के दो महान सारंगी उस्तादों का शिष्य

3

यूरोप के सर्वश्रेष्ठ तबला वादक

4

एक संगीतकार में तीन घराने

5

धनुष और ताल बारी-बारी नेतृत्व लेते हैं

6

रीडिंग में एक दिन में दो कार्यक्रम

Performing Artists

Event Details

रीडिंग के संगीत-प्रेमियों, हमें अत्यंत हर्ष है कि हम दूसरी बार रीडिंग विश्वविद्यालय के द ग्रेट हॉल में वार्षिक कला महोत्सव के अंतर्गत "Reading Raga Resonance: Bow, Beat, and Breath" प्रस्तुत करने जा रहे हैं। 12 सितम्बर 2026 को दोपहर 12:00 बजे हमसे जुड़ें और इस अंतरंग दोपहरी में सारंगी की आत्मा को छूने वाली मधुरता तथा तबले की गतिशील लय के मनमोहक संगीत-संवाद के साक्षी बनें।

इस विशेष दोपहरी में दो अत्यंत प्रतिष्ठित कलाकार प्रस्तुत होंगे: सतविंदर पाल सिंह (सारंगी) और उस्ताद शाहबाज़ हुसैन (तबला)। सतविंदर जी ने बचपन से ही सारंगी की साधना आरंभ की — उनकी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति मात्र 5 वर्ष की आयु में हुई। उनके पिता उनके प्रथम गुरु बने, और आगे चलकर उन्होंने उस्ताद सबरी खाँ और पण्डित राम नारायण जी जैसे महान जीवित उस्तादों से तालीम प्राप्त की। शाहबाज़ हुसैन ने पहले अपने पिता, गायक उस्ताद मुमताज़ हुसैन से तबले की शिक्षा ली, और फिर दिल्ली घराने के उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ, पंजाब घराने के उस्ताद शौकत हुसैन खाँ और उस्ताद अल्लाह रक्खा से गहन अभ्यास किया। उन्होंने एक उदार और बहुमुखी वादन-शैली विकसित की है — वे फ्यूज़न समूह 'Indus' का नेतृत्व करते हैं और शास्त्रीय कलाकारों के साथ दौरों पर भी जाते हैं। शाहबाज़ उत्तरी इंग्लैंड में तबला-शिक्षण में भी सक्रिय हैं।

दोनों कलाकार मिलकर एक अनूठी संवादात्मक प्रस्तुति देंगे जो हमारी प्राचीन संगीत-परम्परा की लय और सुर के गहरे सम्बन्ध को उजागर करेगी। यह कोई सामान्य आयोजन नहीं होगा — यह एक सच्चा संगीत-विनिमय होगा जिसमें गज और ताल दोनों को समान महत्त्व प्राप्त होगा।

प्रस्तुति दो भागों में विभाजित होगी। प्रथम भाग में तबले के सहयोग से सारंगी का एकल वादन होगा — उसकी कण्ठ-सदृश गायकीय सुर-धाराएँ केंद्र में होंगी। द्वितीय भाग में भूमिकाएँ बदल जाएँगी: तबला मंच का नायक बनेगा और सारंगी उसे थामे रहेगी। यह आदान-प्रदान शास्त्रीय कौशल, परस्पर सम्मान और तात्कालिक संगीत-खोज का एक मनमोहक प्रदर्शन होगा।

यह संध्या केवल संगीत नहीं — यह रुकने, विचार करने और ध्वनि (शब्द) के उपचारात्मक अनुनाद का अनुभव करने का निमंत्रण है। भारतीय शास्त्रीय परम्पराओं में सदियों से संगीत को ध्यान का एक रूप माना गया है — अपने भीतर और अपने समाज में संतुलन पुनः स्थापित करने का साधन। जब हम अंतरंग संगीत-सभाओं में एकत्र होकर प्राचीन स्वरों को आत्मसात करते हैं, तो एक नया संसार हमारे सामने खुल जाता है। आज के इस युग में ये कालातीत परम्पराएँ हमें संगीत, मानसिक स्वास्थ्य, सजगता और भावनात्मक कल्याण के बीच के गहरे सम्बन्ध की याद दिलाती हैं। यह संध्या नवीनीकरण का अवसर है — संगीत की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से उठान, जुड़ाव और पुनर्स्थापना का।

यदि आप रीडिंग में या आसपास हैं, तो अवश्य पधारें। किसी विशेष आवश्यकता के लिए हमसे सम्पर्क करें।

दरवाज़े प्रातः 11:30 बजे खुलेंगे, संगीत दोपहर 12:00 बजे आरंभ होगा।

दर्शक नीति:

  • अनधिकृत फ़िल्मांकन या फ़ोटोग्राफ़ी की अनुमति नहीं है।
  • कार्यक्रम के दौरान मोबाइल फ़ोन (संदेश भेजना सहित) का उपयोग वर्जित है। हम आपके सहयोग की विनम्र अपेक्षा करते हैं। धन्यवाद!

Venue Information

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The-Great-Hall-Reading