अदनान खान
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक, गायकी अंग
स्थान
दिल्ली, भारतविशेषज्ञता
सितारआगामी कार्यक्रम
ऑक्सफ़ोर्ड में अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स: दो तार, एक धड़कन
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक अदनान खान, संतूर पर विनय देसाई और तबले पर उस्ताद अकरम खान, होलीवेल संगीत कक्ष में। यह शाम हमारे नवंबर दौरे अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स का हिस्सा है।
मैनचेस्टर में अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स: कश्मीर और दिल्ली के तार
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक अदनान खान, संतूर पर विनय देसाई, और तबले पर उस्ताद अकरम खान तथा मैनचेस्टर के अपने उस्ताद शाहबाज हुसैन। शुक्रवार, 20 नवंबर, शाम 7 बजे, द स्टोलर हॉल, मैनचेस्टर।
लंदन में अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स: छेड़ और आघात
ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक अदनान खान, संतूर पर विनय देसाई और तबले पर उस्ताद अकरम खान। रविवार, 22 नवंबर, शाम 5 बजे, सेंट सेवियर्स, पिमलिको।
अदनान खान के बारे में
अदनान खान ग्रैमी के लिए नामांकित सितार वादक हैं और गायकी अंग में बजाते हैं, यानी उस शैली में जो वाद्य को गायक की आवाज़ के साँचे में ढालती है। वे दिल्ली में रहते हैं, एक ऐसे परिवार में जो पीढ़ियों से यह संगीत बजाता आया है। तार छेड़ते ही उसकी आवाज़ घटने लगती है, इसलिए जो सितारवादक उसे गवाना चाहता है उसे स्वर को कहीं और ले जाना पड़ता है: उस मींड में जो एक स्वर को अगले में मोड़ती है, उस कृंतन में जो दोबारा आघात किए बिना स्वर उठाती है। गायकी अंग यही मेहनत माँगता है, और उनके हाथ इसी के लिए तैयार हुए हैं।
पहली तालीम उन्हें अपने नाना, दिवंगत उस्ताद ज़फ़र अहमद खान से मिली, जो दिल्ली के सितारवादक थे। यह तालीम दरियागंज के उस पुश्तैनी घर में हुई जिसे उस मोहल्ले के संगीतकार मौसीक़ी मंज़िल कहते थे। सितार उस घर में पीढ़ियों से चला आ रहा था और उन्होंने उसे पकड़ने से पहले सुनना सीख लिया। आज भी वे अपने पिता, सितारवादक उस्ताद सईद खान से सीखते हैं, जिन्होंने स्वर और रागदारी का वह स्तर तय किया जिस पर उनका वादन आज भी खरा उतरता है। नाना और पिता के रहते उनके बचपन का ज़्यादातर समय किसी उस्ताद के सामने ही बीता।
गायकी अंग उन तक उनके परिवार के ख़याल गायक उस्ताद मशकूर अली खान के ज़रिए पहुँचा, जिनके पास भारतीय संगीत के सबसे बड़े बंदिश-संग्रहों में से एक है। 2009 से 2013 तक अदनान खान कोलकाता की आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी में वरिष्ठ ए-ग्रेड छात्रवृत्ति पर रहे और वहीं उन्हीं गुरु से सीखा। सितारवादक के बजाय गायक के पास बिताए चार सालों ने उनका सुनने का ढंग बदल दिया। उन्हें पता चला कि साँस कहाँ लेनी है, किसी स्वर को आगे बढ़ने से पहले कितनी देर थामना है, और स्वर-वाक्य का कितना हिस्सा अनकहा छोड़ देना है। आवाज़ से सीखी बंदिश अपने बोलों के साथ आती है, और बोल ही उसकी अदायगी तय करते हैं। उन वर्षों से वे ऐसी बंदिशें लेकर निकले जिन्हें ज़्यादातर सितारवादक सिर्फ़ गीत के रूप में जानते हैं।
उनके वादन में राग की धुन आगे रहती है। पूरे तार पर स्वर एक-सा बना रहता है, और तेज़ से तेज़ तानों में भी राग के स्वर अपनी शक्ल नहीं खोते। वे बार-बार शुद्ध कल्याण पर लौटते हैं, शाम ढलते समय का वह राग जो आरोह में पाँच स्वर लेता है और मध्यम तथा निषाद को अवरोह के लिए बचा रखता है, और मियाँ की मल्हार पर, वर्षा का वह राग जो अपने दोनों निषादों को आमने-सामने खड़ा करता है। शहाना, देर रात का कानड़ा अंग का राग, उनके भंडार में इनके साथ है। वे कार्यक्रम का समापन धुन या ठुमरी से करते हैं, जहाँ गायकी की सुर-रेखा कहीं छिप नहीं सकती। ज़ुहैब अहमद खान और ज़र्ग़ाम खान उनके साथ तबला संगत करते हैं, और उन्होंने उस्ताद अकरम खान के साथ शुद्ध कल्याण रिकॉर्ड किया है।
पहली सार्वजनिक प्रस्तुति उन्होंने आठ साल की उम्र में दी। तब से वे जालंधर के हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में बजा चुके हैं, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत का सबसे पुराना समारोह है, मुंबई के ‘कल के कलाकार’ सम्मेलन में, आईटीसी संगीत सम्मेलन और एमटीवी इंडिया म्यूज़िक समिट में, और उस्ताद विलायत खान फ़ाउंडेशन के लिए। 2016 में चंडीगढ़ में उन्होंने विलंबित गत में शुद्ध कल्याण से शुरुआत की और अफ़ग़ानी धुन अनार अनार पर समापन किया। देश के बाहर वे तुर्कमेनिस्तान के वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल में और बांग्लादेश, बहरीन तथा मालदीव में बजा चुके हैं। उनका सितार Sounds of Kumbha में सुनाई देता है, जो 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में बेस्ट ग्लोबल म्यूज़िक एल्बम के लिए नामांकित हुआ। नवंबर 2026 में वे कलासुधा के साथ अ हंड्रेड स्ट्रिंग्स दौरे पर ब्रिटेन जाएँगे, संतूर वादक विनय देसाई और तबले पर उस्ताद अकरम खान के साथ।