तेजस्विनी दिगंबर वर्णेकर
हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन
स्थान
वाराणसी, भारतविशेषज्ञता
ख़्यालडिस्कोग्राफ़ी
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तेजस्विनी वर्णेकर (पुरवी फेस्टिवल 2023 से लाइव)
तेजस्विनी दिगंबर वर्णेकर के बारे में
तेजस्विनी वर्णेकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित गायिका हैं। राग के गहरे विस्तार, परिष्कृत आवाज़ और मंच तथा शिक्षण, दोनों में सोच-समझकर किए गए काम के लिए वे जानी जाती हैं। बीस साल से ज़्यादा की कड़ी तालीम के बाद उनके गायन में परंपरा की मज़बूत नींव है और आज की संवेदनशील सौंदर्य-दृष्टि भी।
उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्वर्ण पदक पाया है। यह विश्वविद्यालय भारतीय कलाओं के विद्वत्तापूर्ण अध्ययन के लिए जाना जाता है। तेजस्विनी आकाशवाणी की ग्रेड प्राप्त कलाकार भी हैं। यह दर्जा बताता है कि उनकी कला का स्तर लगातार बना रहा है और शास्त्रीय संगीत के मंच पर उनका योगदान रहा है।
उनकी तालीम हिंदुस्तानी परंपरा के प्रतिष्ठित गुरुओं के पास हुई है। उनके संगीत के सफ़र में राग के व्याकरण, लयकारी और भाव की बारीकियों से गहरा जुड़ाव दिखता है। मंच पर वे राग को धीरज और स्पष्टता से खोलने के लिए ख़ास तौर पर जानी जाती हैं, जिसमें चिंतन और ऊर्जा, दोनों के लिए जगह रहती है। वे पारंपरिक ख़याल के साथ उप-शास्त्रीय और भक्ति रचनाएँ भी गाती हैं, और सबको उतनी ही निष्ठा से।
तेजस्विनी ने भारत और विदेश के प्रमुख संगीत समारोहों और मंचों पर गाया है। शास्त्रीय शुद्धता बनाए रखते हुए वे तरह-तरह के श्रोताओं से जुड़ती हैं। उनकी प्रस्तुतियों में सोची-समझी बनावट और सहज भाव का संतुलन रहता है, इसलिए वे रूप को हल्का किए बिना सबकी समझ में आती हैं।
शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में वे संगीतकारों की अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। उनके शिक्षण में अनुशासित रियाज़ और राग के ढाँचे की साफ़ समझ पर ज़ोर रहता है, और इस पर भी कि हर विद्यार्थी अपनी अलग गायकी पाए। वे जल्दी के नतीजों की जगह लंबे समय की संगीत साधना में विश्वास रखती हैं, और वही सिखाती हैं जो खुद रोज़ के रियाज़ में बरतती हैं।
वे कलासुधा की कई पहलों से करीब से जुड़ी रही हैं, जिनमें पूर्वी फ़ेस्टिवल में उनकी भागीदारी और कलासुधा की अकादमी की रूपरेखा तैयार करने में उनकी सक्रिय भूमिका शामिल है। प्रस्तुतियों, साझा कामों और शैक्षणिक योजना के ज़रिए वे कलासुधा के साथ ब्रिटेन और दूसरे देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए टिकाऊ और ऊँचे स्तर के मंच बनाने में लगातार हाथ बँटा रही हैं।