दिल्ली घराना (Dilli) तबला वादन का घराना है, जो इतिहासकार अनीश प्रधान के अनुसार 18वीं सदी के पूर्वार्ध में दिल्ली में सिद्धार खान ढाढ़ी से शुरू हुआ। बहुत से लोग इसे सबसे पुराना तबला घराना और बाक़ी अधिकतर घरानों का स्रोत मानते हैं, हालाँकि डिजीतबला लिखता है कि पंजाब घराना अपने अलग रास्ते पर विकसित हुआ। जेम्स किपेन दिल्ली को उन छह तबला घरानों में गिनते हैं जिन्हें वे व्यापक मान्यता वाले घराने कहते हैं।
स्रोतों में संस्थापक का नाम सिद्धार, Sidhar या सुधार खान लिखा मिलता है, और उपनाम ढाढ़ी या Dhari। स्वरगंगा और डिजीतबला उनका जन्म लगभग 1700 में बताते हैं, गॉटलीब की रिकॉर्डिंग पर स्किडमोर कॉलेज के पाठ्यक्रम नोट्स इसे 18वीं सदी के अंतिम वर्षों में रखते हैं, और कोई भी स्रोत स्थापना का साल तय नहीं करता। प्रधान ने उन्हें सबसे पहले ज्ञात तबला वादक कहा है। तबले की ओर मुड़ने से पहले उन्होंने पखावज (बेलन के आकार का ड्रम) सीखा। स्वरगंगा के अनुसार चाँटी, यानी दाहिने ड्रम के किनारे, पर उनके काम ने तबले को ख़याल गायन की नियमित संगत बना दिया।
संगीतकार दिल्ली की शैली को किनार बाज (किनारे की शैली) कहते हैं, क्योंकि दाहिने हाथ का मुख्य बोल पुड़ी के किनारे पर पड़ता है। कई वाक्यांश केवल तर्जनी और मध्यमा उँगली से बजते हैं, और इसी से इसका दूसरा नाम पड़ा: दो उँगलियों का बाज। प्रधान ने दिल्ली को बंद बाज बताया है, यानी धीमी और बंद आवाज़ वाली शैली, जिसके सामने अधिक गूँजदार और खुली आवाज़ वाला खुला बाज है। डिजीतबला इस भेद को ढीला मानता है, और घराने इस बात में अलग हैं कि वे किस शैली की कितनी शिक्षा देते हैं। क़ायदा (तय पलटों के साथ बजने वाला विषय) पेशकार और रेले के साथ इस घराने के रचना-भंडार के केंद्र में है, और अधिकतर तबला वादक, चाहे उनका घराना कोई भी हो, दिल्ली के क़ायदों की बुनियाद को ज़रूरी मानते हैं।
दिल्ली और अजराड़ा मिलकर दिल्ली बाज बनाते हैं, जिसके सामने लखनऊ, बनारस और फर्रुखाबाद का पूरब (पूर्वी) बाज है। अजराड़ा और लखनऊ, दोनों घराने दिल्ली की परंपरा से निकले हैं। प्रधान ने नत्थू खान को इस घराने का महत्वपूर्ण वादक बताया है। गामे खान के बेटे इनाम अली खान ने 1971 में बंबई में गॉटलीब के एकल तबला सर्वेक्षण के लिए रिकॉर्डिंग की, और स्किडमोर नोट्स उन्हें घराने का ख़लीफ़ा, यानी मुखिया, कहते हैं।
प्रमुख कलाकार
- सिद्धार खान ढाढ़ी, संस्थापक, स्वरगंगा और डिजीतबला के अनुसार जन्म लगभग 1700
- बुगरा खान, स्वरगंगा के अनुसार संस्थापक के बेटे
- सिताब खान, स्वरगंगा के अनुसार बुगरा खान के शिष्य और अजराड़ा के संस्थापकों के गुरु
- नत्थू खान, घराने के वादक, 1875 से 1940
- गामे खान, इनाम अली खान के पिता, 1883 से 1958
- इनाम अली खान, घराने के ख़लीफ़ा, प्रधान के अनुसार 1924 से 1986 (स्किडमोर नोट्स 1990 बताते हैं)
स्रोत
- Aneesh Pradhan, Tabla performances by maestros of the Delhi gharana, Scroll.in (2016)
- SwarGanga Music Foundation, Siddhar Khan पर Artistbase प्रविष्टि (तिथि अज्ञात)
- DigiTabla, Dilli Gharana, Baj और Six Gharanas संदर्भ पेज (तिथि अज्ञात)
- Robert S. Gottlieb, Solo Tabla Drumming of North India (1993), Skidmore College के पाठ्यक्रम नोट्स के माध्यम से
- James Kippen, The Tabla of Lucknow (1988)