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आर. एन. प्रकाश
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फ़िल्टर
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गिटार
जूलियानो मोडारेली अंतरराष्ट्रीय ख्याति के इतालवी गिटार वादक और संगीतकार हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, जैज़ और समकालीन विश्व संगीत का उनका अपना मेल ही उनकी पहचान है। लंदन में रहते हुए उन्होंने गिटार पर अपनी अलग आवाज़ बनाई है, जिसमें भारतीय ताल और राग की परंपराओं की गहरी छाप है और जैज़ की आज़ादी तथा मौके पर रचने की रवानी भी। वे लंबे समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत के कुछ बेहतरीन कलाकारों के साथ बजाते रहे हैं, जिनमें पंडित देबाशीष चक्रवर्ती, शाहबाज हुसैन, आर. एन. प्रकाश और पंडित अजय प्रसन्ना शामिल हैं। सहज महारत और गहरे भाव वाला उनका संगीत संस्कृतियों को जोड़ता है। वे पुरस्कार विजेता फ़्यूज़न समूह केफ़ाया और क्वेस्ट एनसेंबल के संस्थापक सदस्य भी हैं। वे दुनिया भर में बजाते और सिखाते हैं, और संस्कृतियों को जोड़ने वाली उनकी कला श्रोताओं को प्रेरित करती है।
तबला
हनीफ खान की संगीत यात्रा पिता उस्ताद हिदायत खान के मार्गदर्शन में शुरू हुई, जो भारत के सम्मानित तबला वादक थे। वे दिल्ली घराने के कायदा वादन में माहिर हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत के रूपों को श्रोताओं तक पहुँचाने और 'फ़्यूज़न' में अपने हुनर से नए रूप गढ़ने के लिए वे जाने जाते हैं। उनका संगीत करियर उन्हें कई देशों तक ले गया है। वे शास्त्रीय तालीम पाए हुए, मँजे हुए भारतीय तालवादक हैं और कई शैलियों में सहज हैं। उन्होंने हरि प्रसाद चौरसिया, उस्ताद फ़तेह अली खान, ग़ुलाम अली, ग़ुलाम मुस्तफ़ा, पंडित देबाशीष चक्रवर्ती, पंडित अजय प्रसन्ना, अल-मसरी हुसैन और राजन-साजन जैसे नामी कलाकारों की संगत की है।
सितार
जोनाथन मेयर ने पाँच साल की उम्र में संगीत शुरू किया। नाना अल्बर्ट हेप्टन से वायलिन, जेम्स मेथुएन-कैंपबेल से पियानो और अपने पिता से रचना सीखी। सोलह साल की उम्र में उन्होंने सेनिया घराने के शिष्य, पश्चिमी सितार वादक क्लेम अल्फ़र्ड से सितार सीखना शुरू किया। 1993 में उन्होंने बर्मिंघम कंज़र्वेटॉयर से बी.म्यूज़. (ऑनर्स) किया, जहाँ उन्होंने एंड्रयू डाउन्स से रचना पढ़ी और साथ में सितार वादन भी। फिर उन्होंने उस्ताद वजाहत खान से इमदादख़ानी घराने की और पंडित सुब्रतो रॉय चौधरी से सेनिया बीनकार शैली की तालीम लेकर अपनी तकनीक माँजी। आज वे उस्ताद इरफ़ान मुहम्मद खान से लखनऊ-शाहजहाँपुर घराने की उच्च तालीम ले रहे हैं और उस्ताद यूसुफ़ अली खान से ताल की तालीम।
आर. एन. प्रकाश बहुमुखी तालवादक हैं, जो घटम, खंजीरा और मृदंगम जैसे दक्षिण भारतीय ताल वाद्यों में माहिर हैं। उन्होंने 6 साल की उम्र से बेंगलुरु में के.एन. कृष्णमूर्ति से यह कला सीखी।
पियानो
रेकेश चौहान कई पुरस्कार जीत चुके ब्रिटिश भारतीय पियानो वादक और संगीतकार हैं, जो पूर्वी और पश्चिमी शास्त्रीय परंपराओं के नए ढंग के मेल के लिए जाने जाते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत की शुरुआती तालीम उन्हें अपने संगीतकार पिता से मिली और पश्चिमी रचना की औपचारिक शिक्षा विश्वविद्यालय की पढ़ाई के दौरान। इन दोनों को मिलाकर उन्होंने अपनी अलग, भावपूर्ण संगीत-भाषा बनाई है। उनके पास लेस्टर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में फ़र्स्ट क्लास ऑनर्स की डिग्री है। 2015 में आए पहले एल्बम Beyond Roots में तबला वादक कौसिक सेन जी थे और राष्ट्रीय रेडियो ने उस पर ध्यान दिया। तब से रेकेश गहराई और नएपन वाले संगीत रचनाकार के रूप में अपनी साख बनाते गए हैं।
सारंगी
सतविंदर पाल सिंह पंजाब के मोगा से आए, लंदन में रहने वाले सारंगी वादक हैं। वे और उनके पिता सिख पंथ में आकाशवाणी के टॉप ग्रेड सारंगी वादक बनने वाली पहली पिता-पुत्र जोड़ी हैं।
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